“षड्यंत्रपूर्वक फर्जी एफ.आई.आर. दर्ज कराकर पुलिस एवं न्याय व्यवस्था को गुमराह करने वालों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग”

आपका आदेश न्यूज़।। छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (C.D.B.E.) के अध्यक्ष रेव. शुभम कुमार एवं छत्तीसगढ़ डायोसिस के
उपाध्यक्ष रेव. समीप फैकलिन ने एक गंभीर प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि कुछ व्यक्तियों—अजय जॉन, यशराज सिंह, बीन बेनेट, बीन नागराजू एवं—द्वारा पूर्वनियोजित षड्यंत्र रचते हुए, झूठे दस्तावेज़ों एवं असत्य तथ्यों के आधार पर थाना सिविल लाइंस रायपुर में बोर्ड के सचिव श्री नितिन लॉरेंस, श्री जयदीप रॉबिन्सन एवं अन्य पदाधिकारियों के विरुद्ध फर्जी एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई है।

(नीलिमा रोबिनसन )
(अजय जॉन )
(यसराज सिंह एवं वीनू बेनेट )

इन व्यक्तियों ने न केवल पुलिस को गुमराह किया, बल्कि भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 182 (झूठी जानकारी देना), 468 (फर्जी दस्तावेज़ बनाना), 471 (फर्जी दस्तावेज़ का उपयोग करना), एवं 420 (धोखाधड़ी) के अंतर्गत गंभीर आपराधिक कृत्य किया है। इसके अतिरिक्त, धार्मिक-सामाजिक संस्थान को बदनाम करने का यह प्रयास एक साम्प्रदायिक एवं सामाजिक विघटनकारी साजिश के रूप में देखा जा रहा है।

प्राप्त प्रमाणों एवं दस्तावेजों के अनुसार:

दिनांक 29 सितंबर 2022 को जो पंजीयन फ़ॉर्म सोसाइटी रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया गया था, वह बोर्ड की सहमति एवं जानकारी के बिना तैयार किया गया।

20 जुलाई 2023 को जो सूची प्रस्तुत की गई, उसमें श्री नितिन लॉरेंस का नाम सचिव के रूप में स्पष्ट रूप से दर्ज है, जिसे जानबूझकर छुपाया गया।

सोसाइटी के रजिस्ट्रेशन क्रमांक 2937/14 के संदर्भ में गुमराहकारी जवाब थाना एवं रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत किया गया।

ऐसे झूठे तथ्यों पर आधारित एफ.आई.आर. दर्ज करवा कर, आरोपी पक्ष ने न्यायालय एवं पुलिस व्यवस्था को गुमराह किया है।

यह सम्पूर्ण कृत्य सुनियोजित, अपराध की मंशा से प्रेरित तथा एक प्रतिष्ठित अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था के विरुद्ध बदनाम करने की आपराधिक साजिश है, जिसका मुख्य उद्देश्य संस्था के क्रियाकलापों में बाधा उत्पन्न करना एवं निजी स्वार्थों की पूर्ति करना है।

न्यायोचित मांग

हम छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक एवं राज्य शासन से मांग करते हैं कि:

  1. दोषियों पर तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विधिक कार्यवाही की जाए।
  2. साजिशकर्ता समूह की भूमिका की जांच एसआईटी या उच्चस्तरीय समिति से कराई जाए।
  3. संस्था एवं पदाधिकारियों को जानबूझकर बदनाम करने वाले सभी तत्वों के विरुद्ध मानहानि एवं आपराधिक वाद चलाया जाए।

इस पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारीगण का सहयोग अपेक्षित है ताकि सत्य उजागर हो एवं न्याय सुनिश्चित हो।

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