दादी जानकी जी की 6वीं पुण्य स्मृति पर श्रद्धांजलि, उपकार भवन में आयोजित हुआ आध्यात्मिक कार्यक्रम।

महासमुंद डेस्क

महासमुंद 26 मार्च 2026

महासमुंद स्थानीय सेवाकेंद्र उपकार भवन में आज विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संस्थान प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य प्रशासिका रहीं राजयोगिनी दादी जानकी की 6वीं पुण्य स्मृति दिवस श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों सहित पूरे ईश्वरीय परिवार ने एकत्रित होकर दादी जानकी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके नाम से परमपिता परमात्मा शिव को भोग अर्पित कर उनकी पुण्य स्मृतियों को याद किया।

कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने दादी जानकी जी के दिव्य जीवन, त्याग और सेवा भाव को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीती दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि दादी जानकी जी को बचपन से ही परमात्मा की खोज थी। यह खोज उन्हें ब्रह्माकुमारी संस्थान में आकर पूर्ण हुई, जिसके बाद उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन विश्व कल्याण और मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1978 में अमेरिका के टेक्सास विश्वविद्यालय के मेडिकल एंड साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा दादी जानकी जी के आध्यात्मिक सामर्थ्य और मानसिक स्थिरता का अध्ययन किया गया था। इस अध्ययन के आधार पर उन्हें “मोस्ट स्टेबल माइंड इन द वर्ल्ड” अर्थात दुनिया की सबसे स्थिर मन वाली महिला की उपाधि से सम्मानित किया गया, जो आध्यात्मिक शक्ति की एक अनूठी मिसाल मानी जाती है।
दादी जानकी जी ने अपने जीवन में सच्चाई, सफाई और सादगी को सर्वोच्च स्थान दिया। वे सदा आत्मचिंतन का संदेश देते हुए कहा करती थीं— “अपने आप से पूछो, मैं कौन और मेरा कौन?” उनका उत्तर होता था कि मैं अजर-अमर, अविनाशी ज्योति स्वरूप आत्मा हूँ और निराकार ज्योति स्वरूप शिव पिता परमात्मा की संतान हूँ।
अपने आध्यात्मिक जीवन में दादी जानकी जी ने विश्व के पाँचों महाद्वीपों का व्यापक भ्रमण किया और लाखों लोगों तक परमपिता परमात्मा के दिव्य ज्ञान और शांति का संदेश पहुँचाया। उन्होंने मानव जीवन में आध्यात्मिक जागृति, आत्मचिंतन और विश्व शांति की भावना को जागृत करने का कार्य किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी ब्रह्माकुमारी बहनों एवं श्रद्धालुओं ने दादी जानकी जी के बताए मार्ग पर चलने और समाज में शांति, प्रेम एवं आध्यात्मिकता का संदेश फैलाने का संकल्प लिया।

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