ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रमुख माध्यम था गाैठान योजना : विनोद चंद्राकर

भाजपा के गाैधाम योजना से पशु पालकों, महिला समूहों को नहीं मिलेगा लाभ।

महासमुंद डेस्क _
पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर

महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि पूर्ववर्ती कांगेस सरकार की महत्वपूर्ण योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बारी के तहत संचालित गाैठानों को दुर्भावना पूर्वक बंद कर भाजपा सरकार गाैधाम योजना शुरू करने का दिखावा कर रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में गौठान ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ और महिला सशक्तिकरण का प्रमुख केंद्र बना था। ‘गाैठान’ गोधन न्याय योजना के तहत 2 रु. प्रतिकिलो में गोबर खरीदकर महिला स्व-सहायता समूह वर्मी कंपोस्ट, अगरबत्ती, दीये, पेंट और अन्य उत्पाद बना रहे थे। यह पहल न केवल पशुपालकों को आय प्रदान करती थी, बल्कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण रोजगार का बड़ा जरिया बना था। पूरे प्रदेश में 10 हजार गाैठानों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया गया। गाँवों में गौठानों का संचालन ग्राम पंचायतों और महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जाता था।

लेकिन, वर्तमान साय सरकार की गाैधाम योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था से कोसो दूर है। इसका लाभ पशु पालकों, महिला समितियों को मिलता नहीं दिख रहा है।

साय सरकार इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी पंजीकृत गाैशाला समितियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, एनजीओ, ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों आैर सहकारी समितियों देगी। जिससे स्थानीय ग्रामीणों को इसका किसी प्रकार से लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। एनजीओ जैसी संस्थाओं को गाैधाम संचालन की जिम्मेदारी देने से केवल कागजों में ही इसका संचालन होगा। इससे पहले भी रमन सिंह के 15 साल के कार्यकाल में गाैशाला केवल भ्रष्टाचार का केंद्र बनकर रह गया था। गाै वंशों को गाैशाला में ना ही चारा मिल पाता था आैर ना ही पानी। गाैवंशीय पशुओं की भूख से मरने की खबरें आम बात थी।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ी परंपरा को जीवंत बनाए रखने नरवा, गरवा, घुरवा, बारी योजना लाकर गाैधन न्याय योजना के तहत गाैठान प्रारंभ किए। इससे घुमंतु मवेशियों को एक निश्चित आश्रय स्थल तथा भरपूर चारा-पानी मिला। इसके अलावा महिला समितियां गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हुईं। पशु पालकों ने गोबर व गाै मूत्र बेचकर अतिरिक्त लाभ हासिल किया। इससे पशु पालन व गाै वंशीय पशुओं के संरक्षण को बढ़ावा मिला था। पूरे देश में इस योजना की सराहना की गई थी। घुमंतु पशुओं की मृत्यु दर में कमी आई थी। लेकिन, भाजपा की सरकार बनते ही इस महत्वपूर्ण जनहित के योजना को दुर्भावना पूर्वक बंद कर दिया गया। अब गाैधान, गाै अभ्यारण योजना के नाम पर भ्रष्टाचार का खाका तैयार किया जा रहा है।

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