“जैनों के प्रथम दादागुरुदेव श्रीजिनदत्त सूरीश्वर जी की धोलका से अजमेर तक की भाव यात्रा बड़े धूमधाम से निकाली गई”
"दादा गुरुदेव की धोलका से अजमेर तक भव्य चलित भाव यात्रा" "पूज्य विवेकसागर जी ने फरमाया कि अगर जिनदत्त सूरी की हस्ती ना होती तो जैनों की बस्ती ना होती" "उन्होंने कहा की किसी भी…
