“जैनों के प्रथम दादागुरुदेव श्रीजिनदत्त सूरीश्वर जी की धोलका से अजमेर तक की भाव यात्रा बड़े धूमधाम से निकाली गई”

दादा गुरुदेव की धोलका से अजमेर तक भव्य चलित भाव यात्रा

“पूज्य विवेकसागर जी ने फरमाया कि अगर जिनदत्त सूरी की हस्ती ना होती तो जैनों की बस्ती ना होती”

“उन्होंने कहा की किसी भी व्यक्ति का जन्म दो बार होता है, पहली बार माँ के गर्भ से और दूसरी बार जब उसे गुरु का सानिध्य मिलता है”


//आपका आदेश न्यूज़ छत्तीसगढ़//

महासमुंद _ रविवार को पूज्य विवेकसागर जी मसा आदि ठाना-2 की पावन निश्रा में जैनों के प्रथम दादागुरुदेव श्रीजिनदत्त सूरीश्वर जी की धोलका से अजमेर तक की भाव यात्रा बड़े धूमधाम से निकाली गई । प्रात: 8.30 बजे वल्लभ भवन में प्रवचन में पूज्य विवेकसागर जी ने फरमाया कि अगर जिनदत्त सूरी की हस्ती ना होती तो जैनों की बस्ती ना होती । उन्होंने कहा की किसी भी व्यक्ति का जन्म दो बार होता है, पहली बार माँ के गर्भ से और दूसरी बार जब उसे गुरु का सानिध्य मिलता है । श्री जिनदत्त सूरी गुरुदेव नें एक लाख तीस हज़ार लोगों को जैन बनाया था ।

स्थानीय मेघराज बगतावरमल श्रीश्रीमाल जी के निवास स्थान में दादागुरुदेव की जन्मस्थली धोलका नगरी सजाई गई थी, जहाँ उनके जन्म, दीक्षा, ग्रंथ रचना, अंधे की आँख में रोशनी देना, भयानक बिजली को अपने पात्र में समा लेना और लाखों जन को जैन बनाने की मनमोहक झांकी तैयार की गई थी ।

जैन मंदिर में प्रवचन के बाद सकल जैन संघ गांधी चौक स्थित धोलका नगरी गाजे बाजे के साथ पहुंचा, जहां श्रीश्रीमाल परिवार द्वारा द्वारोद्घाटन के पश्चात झांकियों का विश्लेषण व विवेचन के साथ प्रदर्शन हुआ । उसके बाद दादागुरुदेव की आरती और मंगलदीपक हुआ, जिसके लाभार्थी टीकमचंद मनोज कुमार पीचा परिवार और अनोपचंद जवेरीलाल गोलछा परिवार थे । तत्पश्चात धोलका नगरी से दादा गुरुदेव की पालकी यात्रा सकल संघ की उपस्थिति में गाजे बाजे के साथ अजमेर नगरी श्री नेमीचंद मनोज कुमार मालू के मेघ बसंत स्थित निवास स्थान पहुँची ।

अजमेर नगरी में दादागुरुदेव कि अष्टप्रकारी पूजा की गई । ज्ञात हो कि अजमेर दादागुरुदेव श्री जिनदत्त सूरी जी की साधना स्थली एवं स्वर्गारोहण स्थली है एवं अजमेर में विश्व की प्रथम दादबाड़ी स्थित है । रायपुर से पधारे केवल्यधाम के ट्रस्टी सुपारस गोलछा ने अजमेर में दादाबाड़ी के भव्य पुनर्निर्माण की जानकारी दी और सभी से वरदहस्त से सहयोग करने की अपील की ।

इस अवसर पर विचक्षण जैन विद्यापीठ के ट्रस्टी, RITEE कॉलेज के चेयरमैन सहित रायपुर, दुर्ग, धमतरी, राजिम, फिंगेश्वर, बागबाहरा के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे । साथ ही श्रीमती आकांक्षा सौरभ मालू के 11 उपवास के उपलक्ष्य में स्वामी वात्सल्य श्री शांतिनाथ भवन में रखी गई थी । झांकी व्यवस्था के प्रमुख धीरज गोलछा ने बताया की प्रथम दादागुरुदेव के जीवन से जुड़ी अचरज भरी घटनाओं का जैन पाठशाला के बच्चों द्वारा मॉडल बनाकर जीवंत झाकी की रचना की गई थी, जिससे उनके जीवन को समझने और जानने का अवसर सभी को प्राप्त हुआ । उक्त जानकारी श्रीमती ललिता बरडिया एवं रितेश गोलछा ने संयुक्त रूप से दिया ।

रात को गुरु एकतीसा और भक्ति का आयोजन
जैन श्री संघ के सचिव सीए रितेश गोलछा ने आगे जानकारी देते हुए बताया की आज रात को धोलका नगरी में गुरुएकतीसा एवं मनोज मालू जी के निवास स्थान में परमात्म भक्ति का आयोजन किया गया है । इस पूरे आयोजन में नम्रता बरडीया,नेहा लुनिया, निधि झाबक, कुमकुम पारख का महत्वपूर्ण योगदान रहा ।

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