“टोकन नहीं कटा_और कट गया गला किसान का”…!


।।आपका आदेश न्यूज़ छत्तीसगढ़।।

सच में…! किसान होना हर किसी की बात नहीं।


आखिर सिस्टम क्यों हो रहा है इतना लापरवाह…? पूछता है किसान…!


“धान बेचने खड़े किसान का सब्र टूट जाने से हुआ यह हादसा”


“धान खरीदी केंद्र खेमड़ा की लापरवाही ने किसान को धकेला मौत की दहलीज पर”


“ब्लेड से गला काट आत्महत्या का प्रयास… क्षेत्र में हड़कंप”


महासमुंद।
छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। सरकारी दावों, घोषणाओं और किसान हितैषी नीतियों के बीच जो घटना सामने आई, उसने पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया।


ग्राम पंचायत बोडरीदादर (सेनभाठा), विकासखंड बागबाहरा के निवासी किसान मनबोध गाड़ा ने धान खरीदी केंद्र खेमड़ा, सहकारिता बैंक मुंगासेर की लगातार लापरवाही से तंग आकर ब्लेड से अपना गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया।

घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया, वहीं किसानों में भी गुस्सा और भय फैल गया है।
किसान की महीनों की मेहनत… और सिस्टम का बेरहम रवैया।


मनबोध गाड़ा अपनी मेहनत की फसल को बेचने धान खरीदी केंद्र पहुँचा था।
लेकिन—
टोकन नहीं कट रहा…
कभी सर्वर डाउन…
कभी समय समाप्त…
कभी ‘कल आइए’ का बहाना…
और हर दिन किसान के आत्मसम्मान पर एक और जोरदार चोट।


किसान धान के साथ रोज़ समिति का चक्कर लगाता रहा, उम्मीदों को थामे… लेकिन सिस्टम ने जैसे उसके लिए हर दरवाजा बंद कर रखा था।


कर्ज का बोझ, घर की जिम्मेदारी… और इच्छा शक्ति का टूटना
धान तैयार था।
कर्ज सिर पर चढ़ा था।
परिवार उम्मीद लगाए बैठा था।


लेकिन जब सहकारिता तंत्र की बेरुख़ी, तकनीकी अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही ने किसान को हर मोड़ पर धकेला, तब आखिरकार उसका सब्र टूट गया।


निराशा और हताशा से घिरकर मनबोध गाड़ा ने खरीदी केंद्र परिसर के पास ही ब्लेड से गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। मौजूद लोगों ने उसे किसी तरह रोका और अस्पताल तक पहुँचाया।


इलाके में तनाव— किसान बोले, “हमारी जान की कीमत क्या?”


घटना के बाद गांवों में रोष है। किसानों का कहना है—
“धान तैयार है, लेकिन खरीदी केंद्र हमारे लिए बंद दरवाज़ा बन गया है।
रोज़-रोज़ अपमान, इंतजार और परेशानियाँ मिल रही हैं।
आखिर हमारी मेहनत और जान की कीमत क्या है?”


किसान संगठनों ने धान खरीदी की अव्यवस्था पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।


प्रशासन व सहकारिता तंत्र पर गंभीर सवाल
यह घटना अब कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है—
धान खरीदी में टोकन व्यवस्था बार-बार क्यों फेल हो रही है ?


किसान को अपनी ही फसल बेचने के लिए अपमान और त्रासदी से क्यों गुजरना पड़ता है ?
क्या खरीदी केंद्रों की निगरानी सिर्फ कागज़ों में हो रही है?


किसान आत्महत्या को मजबूर हो जाए, इसका जिम्मेदार कौन?


फिलहाल किसान का इलाज जारी, प्रशासन सक्रिय होने की कोशिश में।


मनबोध गाड़ा को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।
प्रशासनिक अधिकारी खरीदी केंद्र की कार्यप्रणाली की जांच की बात कर रहे हैं, लेकिन किसानों में यह सवाल गूंज रहा है—
“क्या जांच से किसानों की टूटी हुई उम्मीदें वापस लौट आएंगी?”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *