रायपुर के आजाद चौक में “आजाद” कहां है ?
“हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के एक प्रमुख सदस्य थे काकोरी कांड के चंद्रशेखर आज़ाद”
“काकोरी कांड में चंद्रशेखर आज़ाद की भूमिका महत्वपूर्ण थी”
लेख _ प्रकाश नारायण शुक्ला ( बाबा )की कलम से…

आपका आदेश न्यूज़ छत्तीसगढ़ // रायपुर छत्तीसगढ़_ शहीद ए आजम चंद्रशेखर आज़ाद जी को 23 जुलाई जयंती के अवसर पर पर सादर नमन।
काकोरी कांड में चंद्रशेखर आज़ाद की भूमिका महत्वपूर्ण थी। वह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के एक प्रमुख सदस्य थे और इस घटना की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में सक्रिय रूप से शामिल थे. हालांकि, वह गिरफ्तारी से बचने में सफल रहे और बाद में HRA का पुनर्गठन किया
आज़ाद काकोरी कांड में शामिल दस क्रांतिकारियों में से एक थे, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटना था ताकि क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाया जा सके।
“आज़ाद ने इस घटना की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई”
हालांकि राम प्रसाद बिस्मिल को इस योजना का मुख्य सूत्रधार माना जाता है,उक्त योजना में ठाकुर रोशन सिंह , अशफाकउल्ला खान, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को फांसी की सजा सुनाई गई। काकोरी षडयंत्र में कुल दस क्रांतिकारी शामिल थे।
काकोरी कांड के बाद आज़ाद एकमात्र प्रमुख क्रांतिकारी थे जो गिरफ्तारी से बचने में सफल रहे इस दौरान वो रायपुर आए व ग्राम बदरका के मूल निवासी पंडित गोपेश्वरनाथ अवस्थी जो रायपुर आकर निवासरत थे उनके घर जो उस समय रायपुर के (आज के मालवीय रोड) में कुछ दिन रहे पंडित गोपेश्वरनाथ जी जो पेशे से सिविल कॉन्ट्रैक्टर थे। धमतरी जिले के रुद्रीबैराज के पास भाटागांव के गेस्ट हाउस निर्माण का कार्य कर रहे थे उन्होंने ही आजाद जी को गेस्ट हाउस परिक्षेत्र में अपने गांव का युवक बता कर एक झोपडी में रहने की व्यवस्था कराई। आजाद छद्मवेष छद्मनाम से कई महीनों वहां रहे इस बात की पुष्टि एक साक्षात्कार के दौरान CG wall YouTube channel में वरिष्ठ पत्रकार श्री ज्ञान अवस्थी जी वर्तमान बिलासपुर निवासी जो पंडित गोपेश्वरनाथ अवस्थी जी के पौत्र हैं। वो कहते हैं आजाद जो अपने बाकी साथियों की चिंता में व्याकुल थे उन्होंने वहां से निकल जाना उचित समझकर वापस बैलगाड़ी से रायपुर आए और कंकाली तालाब जो उस समय ब्राम्हणपारा और आस पास क्षेत्र की एक मात्र निस्तारी थी स्नान कर रहे थे तब उनकी भेंट क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सेनानीयों से हुई। उल्लेखनीय है कि समूचे छत्तीसगढ़ अंचल में विशेषकर रायपुर में ब्राम्हण पारा स्वतंत्रता सेनानियों का गढ़ हुआ करता था व स्वर्गीय श्री महादेव प्रसाद पाण्डेय जी जो एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी हुआ करते थे ने लारी स्कूल के सामने डॉ जनस्वामि नेत्र चिकित्सालय के पीछे बुढ़ापापारा में आजाद को रुकवाया था और वर्तमान आजाद चौक में इनकी नित्य बैठकें हुआ करती थीं कुछ दिनों उपरांत अचानक ही आजाद गायब हो गए आज़ाद ने 1928 में HRA का पुनर्गठन किया और 1931में अपनी शहादत तक संगठन का नेतृत्व किया 27 फरवरी, 1931 को, इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क जिसे स्थानीय लोग गोरा गार्डन के नाम से भी जानते हैं में पुलिस के साथ मुठभेड़ में, आज़ाद ने खुद को गोली मारकर अपनी शहादत दी, ताकि वे अंग्रेजों के हाथों गिरफ्तार न हों।

काकोरी कांड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण घटना थी, और चंद्रशेखर आज़ाद की भूमिका इस घटना को सफल बनाने और उसके बाद क्रांतिकारी गतिविधियों को जारी रखने में महत्वपूर्ण थी कुछ समय बाद आजाद के समर्थकों ने उस स्थान को आजाद की स्मृति में आजाद चौक कहकर पुकारने लगे लेकिन दुर्भाग्य है कि जानकारी के अभाव में इस घटना की न कहीं कोई चर्चा है न ही नगर निगम के अभिलेखों में इसका कोई उल्लेख है जब मेरे द्वारा आजाद चौक में उनकी जयंती, पुण्यतिथि मनाना आरम्भ किया तो निगम के बाबू स्तर के कर्मचारी ने ऐसी कोई जानकारी नहीं होने बात कही खैर संघर्ष जारी है और एक दिन आजाद जी को उनका स्थान मिलेगा इस बात का पक्का विश्वास है
गुलाम भारत के पहले आजाद को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

परितोष शर्मा
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