भारत रत्न के योग्य “वीर सावरकर ” नासिक से उठी राष्ट्रवादी हुंकार…।

आपका आदेश न्यूज़ //28 मई, बुधवार का दिन, भारत के इतिहास में एक नई चेतना का प्रतीक बन गया है। आज, भगुर नासिक स्थित सावरकर जन्मस्थली से एक ऐतिहासिक यात्रा का आरंभ हुआ — यह यात्रा है, भारत माँ के वीर सपूत विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न दिलाने की।

इस आयोजन के सूत्रधार हैं — अभिनव भारत पार्टी, और इसके प्रेरणास्रोत, संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री चेतन शर्मा जी, जो इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे सावरकर जी की जन्मस्थली पर वैदिक मंत्रों, राष्ट्रगान और क्रांतिकारी नारों के साथ हुआ।

वीर सावरकर: भारतमाता के अमर सपूत

वीर सावरकर का जीवन बलिदान, साहस और राष्ट्रवाद की त्रयी से बना हुआ था। उन्होंने युवावस्था से ही विदेशी शासन के विरुद्ध बिगुल फूँक दिया था।

अंडमान की काली कोठरी में वह 13 वर्षों तक यातनाएं सहते रहे, किंतु झुके नहीं।

उन्होंने “1857 का स्वतंत्रता संग्राम” जैसी पुस्तकें लिखीं, जो भारतीय चेतना को जागृत करती रहीं।

उनका “हिंदुत्व” केवल धार्मिक विचार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का दर्शन था।


भारत रत्न – केवल सम्मान नहीं, राष्ट्र की ऋणमुक्ति है

आज जब स्वतंत्र भारत अपनी पहचान और गौरव को फिर से परिभाषित कर रहा है, तब वीर सावरकर को भारत रत्न देना केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक न्याय होगा।
यह उस त्याग, उस तपस्या, उस दर्शन को राष्ट्र की मुख्यधारा में पुनः स्थापित करने का प्रतीक होगा।

नासिक से उठी पुकार – अब होगा न्याय

अभिनव भारत पार्टी द्वारा प्रारंभ की गई यह यात्रा केवल एक मांग नहीं, बल्कि एक राष्ट्रवादी आंदोलन है। श्री चेतन शर्मा जी के नेतृत्व में यह आंदोलन आने वाले समय में देश के कोने-कोने तक पहुँचेगा, और हर देशभक्त की आवाज बनेगा।

यह केवल सावरकर जी को सम्मान नहीं,
यह भारत को उसका स्वाभिमान लौटाने का अभियान है।

आइए, हम सब इस पुनीत यज्ञ में सहभागी बनें।
वीर सावरकर को भारत रत्न दिलाकर राष्ट्र के आत्मगौरव को पुनः जागृत करें।

जय हिंद!
वंदे मातरम्!
परितोष शर्मा की कलम से

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